Friday, 27 September 2019

पुनारुदय

जगन्नाथपुरी में हम जिस मकान में ठहरे हुए थे, वह स्वर्गद्वार(स्नान करने के लिए समुद्र का किनारा) से थोड़ी ही दूरी पर था तथा आदि शंकराचार्य के द्वारा स्थापित गोवर्धन मठ के एकदम पास था।

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